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Wednesday, 1 February 2012

सॉरी जाना

सॉरी जाना,
अब से मेरा 
सर मत खाना
खाना हो तो
खाना खाना

गुस्सा हो के
क्या पाओगी
रोते रोते 
सो जाओगी
जागोगी तो
याद आएगा
गुस्सा होने 
का बहाना
कहता हूँ ना
सॉरी जाना

तुम गुस्सा हो,
मैं गुमसुम हूँ.
गलती मेरी,
मैंने माना.
देखो कितना 
अच्छा हूँ मैं.
क्यूट हूँ कितना,
बच्चा हूँ मैं.
सॉरी बोला,
कान पकड़ के 
अब तो जाने
दो न जाना!
कहता हूँ न
सॉरी जाना.


अपनी गलती
मैंने मानी,
तुम भी अब तो
मानो जाना.
तुम परियों की
रानी ठहरी 
मैं तो सेवक
दास तुम्हारा.
नहीं मानोगी?


लडती हो तुम,
गन्दी हो तुम.
गलती हरदम
करती हो तुम.
मेरा बड़प्पन,
हंसकर फिर भी
कहता आया 
सॉरी जाना.
बहुत मनाया,
अब भागो तुम.
रूठा मैं हूँ.
होगा तुमको
मुझे मनाना!

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